केन्‍द्रीय विद्युत, नवी और नवीकरणीय ऊर्जा एवं कौशल विकास तथा उद्मिता राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री राजकुमार सिंह ने आज नयी दिल्‍ली में राज्‍य ऊर्जा दक्षता सूचकांक 2019 जारी किया जो जो 97 महत्वपूर्ण संकेतकों के आधार पर 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऊर्जा दक्षता (ईई) पहल की प्रगति पर नजर बनाए रखता है। यह सूचकांक 09-10 जनवरी 2020 को प्रवासी भारतीय केंद्र, में आयोजित समीक्षा, योजना और निगरानी बैठक के अवसर पर जारी किया गया।

सूचकांक किसने विकसित किया है?

यह सूचकांक एलायंस फॉर एफिशिएंट इकॉनमी तथा ऊर्जा दक्षता ब्‍यूरो द्वारा मिलकर विकसित किया गया है। यह राज्‍यों को ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु से संबधित लक्ष्‍यों को हासिल करने में मदद करेगा। इसके साथ ही यह ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में राज्‍यों द्वारा की गई प्रगति और राज्‍यों तथा देश के एनर्जी फुट प्रिंट के प्रबंधन पर भी नजर रखने में सहायक होगा।

सूचकांक का इतिहास

पहला ऐसा सूचकांक ‘राज्‍य ऊर्जा दक्षता तैयारी सूचकांक 2018’  पहली अगस्‍त 2018 को जारी किया गया था जो राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक 2018 से आगे उठाया गया कदम था। । इसी दिशा में आगे अब राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक 2019 जारी किया गया है जिसमें गुणात्मक, मात्रात्मक और परिणाम आधारित संकेतकों के माध्‍यम से पांच अलग अलग क्षेत्रों जैसे भवन निर्माण उद्योग, नगर पालिका, परिवहन, कृषि,एमएसएमई क्‍लस्‍टरों और डिस्‍काम में ऊर्जा दक्षता के पहलों ,कार्यक्रमो और परिणामों का आकलन किया जाना है।

सूचकांक के लिए जरूरी डेटा राज्‍यों से अधिकार प्राप्‍त एजेंसियों की मदद से संबंधित राज्‍यों के विभागों जैसे डिस्‍कॉम, श‍हरी विकास विभाग तथा अन्‍य विभागों से एकत्र किया गया। इस इस वर्ष, नीति और विनियमन, वित्तपोषण तंत्र, संस्थागत क्षमता, ऊर्जा दक्षता उपायों को अपनाने और ऊर्जा बचत के प्रयासों और उपलब्धियों के आधार पर कुल 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का आकलन किया गया है।

तर्कसंगत तुलना के लिए राज्‍यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों को कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति (टीपीईएस) पर आधारित चार समूहों में बांटा गया है, जो पूरे राज्य की वास्तविक ऊर्जा मांग (बिजली, कोयला, तेल, गैस, आदि) क्षेत्रों में पूरा करने के लिए आवश्यक हैं। टीपीईएस ग्रुपिंग राज्यों को प्रदर्शन की तुलना करने और अपने सहकर्मी समूह के भीतर सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने में मदद करेगा। टीपीईएस पर आधारित चार श्रेणियों के तहत, हरियाणा, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पुडुचेरी और चंडीगढ़ को राज्य ऊर्जा दक्षता सूचकांक 2019 में प्रगतिशील राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में दर्शाया गया है।

राज्‍यों द्वारा की गई प्रमुख पहलें

राज्‍य ऊर्जा दक्षता सूचकांक 2019 दर्शाता है कि राज्यों द्वारा की गई अधिकांश पहलें नीतियों और विनियम से संबंधित हैं। बीईई द्वारा मानकों और लेबलिंग (एस एंड एल), ईसीबीसी, परफॉर्म अचीव एंड ट्रेड (पीएटी), आदि के कार्यक्रमों के तहत तैयार की गई पहली-पीढ़ी की ऊर्जा दक्षता नीतियों में से अधिकांश को राज्‍यों  ने अच्‍छी तरह से अपनाया है और अगले चरण में उन्हें ऊर्जा बजत पर अधिक ध्‍यान केन्द्रित करने की आवश्‍यकता है। बचत प्राप्त करने के लिए। इस वर्ष राज्यों द्वारा भेजी गई प्रतिक्रियाओं के विश्लेषण के आधार पर, राज्य की एजेसिंयों के लिए एक तीन-बिंदुओं वाले एजेंडे का सुझाव दिया गया है:

  1. नीति निर्माण और कार्यान्वयन में राज्यों की सक्रिय भूमिका: नीतियों से ज्‍यादा नीतियों के कार्यान्‍वयन पर ध्‍यान केन्द्रित करने पर जोर

  2. डेटा संकलन तथा सार्वजनिक रूप से उसकी उपलब्‍धता की व्‍यवस्‍था को मजबूत बनाना: इस वर्ष का सूचकांक तैयार करते समय राज्‍य की एजेसियों ने विभिन्‍न विभागों से डेटा प्राप्‍त करने में सक्रियता दिखाई। हालांकि उन्‍हें इस दिशा में और अच्‍छे तरीके से काम करने के लिए विभिन्‍न विभागों और निजी क्षेत्रों के साथ बेहतर तालमेल बैठाना होगा।

  3. ऊर्जा दक्षता कार्यक्रम की विश्‍वसनीयता बढ़ाने के उपाय: आम उपभोक्ताओं के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष जुड़ाव वाले कार्यक्रमों के महत्‍व को सुनिश्चित करना ऊर्जा दक्षताबाजार में बदलाव लाने के लिए महत्वपूर्ण है। इसके लिए राज्‍यों को ऊर्जा बचत कउपायों के अनुपालन के साथ साथ स्‍वतंत्र रूप से इन पर निगरानी रखने की भी व्‍यवस्‍था करनी होगी जो कि ऊर्जा दक्षता नीतियों और कार्यक्रम का अहम हिस्‍सा हैं।

Source: PIB

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