सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आम्रपाली ग्रुप पर तल्ख टिप्पिणयां कीं। अदालत ने कहा, ‘आम्रपाली समूह ने घर खरीदने वाले हजारों लोगों से धोखाधड़ी कर ‘फर्स्ट डिग्री क्राइम’ किया है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि धोखाधड़ी के पीछे कितने प्रभावशाली लोग हैं। उन्हें नामजद किया जाएगा और उन पर मुकदमा चलाया जाएगा।’

सुप्रीम कोर्ट ने कोई भी गड़बड़ नहीं करने के ग्रुप के दावे खारिज कर दिए। अदालत ने कहा कि ग्रुप और उसके डायरेक्टर्स के लिए हमारा संदेश स्पष्ट है।

‘हमें आम्रपाली के ऑडिटर्स का लाइसेंस रद्द कर देना चाहिए था’

  1. जस्टिस अरुण मिश्रा और यूयू ललित की बेंच ने यह टिप्पणी तब की जब आम्रपाली की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट्स गीता लूथरा और गौरव भाटिया ने कहा, ‘ग्रुप ने कोई गलती नहीं की है। 3,500 करोड़ रुपए को दूसरे कामों पर खर्च नहीं किया गया है, जैसा कि कोर्ट की ओर से नियुक्त फॉरेंसिक ऑडिटर्स ने दावा किया है।’
  1. बेंच ने कहा, ‘वह कंपनी के संदिग्ध आचरण को देखते हुए 3,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को दूसरी जगह लगाए जाने के मामले में उसकी दलील विश्वास नहीं कर सकती। कंपनी ने घर खरीदने वालों, बैंकों और अधिकारियों समेत हर किसी के साथ धोखाधड़ी की। आपने फर्जीवाड़े की सभी हदें पार की दीं।’
  1. अदालत ने कहा, ‘आपने घर खरीदने वाले हजारों लोगों को ठगकर ‘फर्स्ट डिग्री क्राइम’ किया है। हमें फर्जीवाड़े को लेकर आम्रपाली के स्टैचटॉरी ऑडिटर्स का लाइसेंस बहुत पहले ही रद्द कर देना चाहिए था। हम ओपन कोर्ट में कह रहे हैं कि इस धोखाधड़ी के पीछे प्रभावशाली लोग हैं। हालांकि, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता वे कितने शक्तिशाली हैं। हम उन्हें नामजद करेंगे और उन पर मुकदमा चलाएंगे। हम किसी को भी नहीं बख्शेंगे।’

(Adapted from Bhaskar.com)