आम तौर पर लोग रेंटल इनकम या भविष्य में प्रॉपर्टी की कीमतों में होने वाले इजाफे को देखते हुए निवेश करते हैं। हालांकि, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) के जरिए बिना भौतिक रूप से प्रॉपर्टी में निवेश किए उसका फायदा उठाया जा सकता है।

क्या होता है REIT?
REIT म्युचुअल फंडों के जैसे ही होते हैं जहां निवेशक किसी अंतर्निहित प्रतिभूति के रूप में रियल एस्टेंट में निवेश करते हैं। मतलब REIT आपके द्वारा जुटाए गए पैसों का निवेश ऐसी प्रॉपर्टीज में करते हैं जहां मुनाफे या रेंटल इनकम की संभावना सबसे अधिक होती है। हालांकि, कुछ मामलों में यह म्युचुअल फंडों से भिन्न भी होता है।

वास्तव में REIT एक ट्रस्ट है जो स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) के जरिए रियल एस्टेट में पैसे लगाता है। REIT में तीन इकाइयां शामिल होती हैं- स्पॉन्सर, मैनेजर और ट्रस्टीज।

REIT में निवेश के फायदे
REIT के जरिए देश की कॉमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश किया जा सकता है। भारत में REIT को सिर्फ कॉमर्शियल प्रॉपर्टीज में ही निवेश की अनुमति मिली हुई है। इसलिए एक निवेशक के तौर पर देश के विभिन्न SEZ, ऑफिस, मॉल आदि में निवेश किया जा सकता है।

कैसे करें RIET में निवेश?
REIT में निवेश के लिए डीमैट अकाउंट होना चाहिए। हाल ही में एंबेसी REIT का आईपीओ आया था जिसमें निवेश की न्यूनतम रकम 2.4 लाख रुपये तय की गई थी। हालांकि, बाजार नियामक सेबी ने REIT में निवेश की न्यूनतम राशि 2 लाख रुपये से घटाकर 50,000 रुपये कर दिया था।

किन निवेशकों को करना चाहिए REIT में निवेश:
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे निवेशक जो कम से कम 3 से 5 साल की समयसीमा लेकर चल रहे हैं उन्हें REIT में निवेश पर विचार करना चाहिए। रेंटल इनकम बढ़ने के साथ ही उनके रिटर्न में भी इजाफा होता रहेगा।

(Adapted from jagran.com)