आइएनएक्स मामले में कार्ति चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उच्च अदालत ने कार्ति चिदंबरम को मई और जून में अमेरिका, स्पेन और जर्मनी जाने की इजाजत दे दी है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने साथ ही ये आदेश भी दिया है कि इसके लिए कार्ति को 10 करोड़ की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी।

इससे पहले मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कार्ति द्वारा विदेश जाने की अनुरोध पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया था। तब कोर्ट ने कहा था कि ये ऐसा मामले नहीं है कि इसके लिए तुरंत सुनवाई की जाए। वहीं सोमवार को दिल्ली की एक अदालत ने एयसेल मैक्सिस मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और कार्ति की गिरफ्तारी पर अंतरिम छूट की अवधि 30 मई तक के लिए बढ़ा दी है। गौरतलब है कि सीबीआई और ईडी की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जांच पूरी करने के लिए और समय मांगा जिसके बाद यह अनुरोध किया।

क्या है एयरसेल मैक्सिस केस?
साल 2006 में फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड से जुड़ा एयरसेल मैक्सिस केस सामने आया। पी चिदंबरम ने बतौर वित्त मंत्री इस डील को मंजूरी दी थी। पी चिदंबरम पर आरोप है कि उनके पास महज 600 करोड़ रूपये तक के ही प्रोजेक्ट प्रपोजल्स को मंजूरी देने का अधिकार था। उन्हें इससे बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी देने के लिए कैबिनेट समिति से मंजूरी लेना जरूरी था। एयरसेल मैक्सिस डील केस 3500 करोड़ की एफडीआई की मंजूरी का था। इसके बाद भी चिदंबरम ने इस डील को कैबिनेट की मंजूरी के बिना पास कर दिया। इस मामले में इडी द्वारा दायर चार्जशीट में पी चिदंबरम, बेटे कार्ति चिदंबरम के अलावा कुल 18 आरोपी हैं।

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