स्टार्ट-अप कंपनियों को फंड जुटाने में हो रही दिक्कतों के निदान के लिए सरकार ने आयकर कानून में ढील देने की तैयारी की है। इसके तहत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (डीपीआइआइटी) ने एक प्रस्ताव रखा है कि रिहाइशी संपत्तियों की बिक्री के अलावा किसी वित्त वर्ष के घाटे को उससे अगले वित्त वर्ष में समायोजित करने से जुड़े आयकर नियमों में ढील दी जा सकती है।

ये सुझाव डीपीआइआइटी द्वारा तैयार ‘स्टार्ट-अप विजन 2024’ दस्तावेज का हिस्सा हैं। पूंजी जुटाने में मुश्किलों का सामना कर रही स्टार्ट-अप कंपनियों की दिक्कतें दूर करने के मकसद से डीपीआइआइटी ने नई सरकार के लिए यह विजन दस्तावेज तैयार किया है।

डीपीआइआइटी ने आयकर कानून की धारा 54जीबी में ढील देने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत रिहाइशी संपत्तियों की बिक्री के चुनिंदा मामलों में कैपिटल गेन टैक्स से छूट दी जा सकती है। डीपीआइआइटी ने आयकर कानून की धारा 79 में भी संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसके माध्यम से चुनिंदा कंपनियों के मामले में नुकसान को अगले वित्त वर्ष में समायोजित करने पर विचार किया जा सकता है।

अधिकारियों के मुताबिक स्टार्ट-अप कंपनियों को नुकसान अगले वित्त वर्ष में समायोजित करने के लिए इस वक्त 100 फीसद हिस्सेदारी उनके ही पास रहने की शर्त है। इसे घटाकर 26 फीसद किया जा सकता है, ताकि स्टार्ट-अप कंपनियों को नए निवेशक मिलें।

(Adapted from Jagran.com)