पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर की संपत्ति जब्त कर ली है। साथ ही उसके विदेश आने-जाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। मसूद को 1 मई को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने वैश्विक आतंकी घोषित किया था। भारत इसके लिए 10 साल से कोशिशें कर रहा था।

पाक विदेश मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को जारी नोटिफिकेशन में कहा गया कि सरकार ने आदेश पारित किया है कि अजहर के खिलाफ रेजोल्यूशन 2368 (2017 का) पूरी तरह से लागू किया जाएगा। अफसरों को निर्देश दिए गए कि मसूद के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों को पूरी तरह से अमल में लाया जाए। अजहर पर हथियारों की खरीद-बिक्री पर भी बैन लगाया गया है।

‘चीजें आपके अनुकूल हो सकती है’
यूएन में भारतीय राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने गुरुवार को बताया कि जैश सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने के मामले पर उन्होंने धोनी जैसा नजरिया अपनाया। अकबरुद्दीन ने न्यूज एजेंसी से कहा कि मैं एमएस धोनी के समान काम करने में यकीन रखता हूं। धोनी केवल लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए धीरज बनाए रखते हैं। अकबरुद्दीन ने कहा- धोनी यह मानते हैं कि आखिर में ही सही, मगर चीजें आपके अनुकूल हो सकती हैं। मैं भी यह मानता हूं कि किसी को भी जल्दी उम्मीद नहीं छोड़ना चाहिए।

इससे पहले मीडिया से बातचीत के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, “मसूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने की एक वजह पुलवामा आतंकी हमला भी है। जैश ने इसकी जिम्मेदारी ली थी।” प्रवक्ता ने ये भी साफ किया कि इस मामले में चीन का रुख बदलने के पीछे किसी तरह की सौदेबाजी या उसकी कोई शर्त मान लेना नहीं है।”

पाकिस्तान की बड़ी कूटनीतिक पराजय
रवीश ने कहा कि जैश सरगना को वैश्विक आतंकी घोषित किया जाना पाकिस्तान के लिए बड़ी कूटनीतिक हार है। भारतीय विदेश मंत्रालय का यह बयान तब सामने आया है जब पाकिस्तान ये दावा कर रहा है कि उसने तमाम राजनीतिक तथ्यों का अध्ययन करने के बाद प्रस्ताव पर हामी भरी है। रवीश ने कहा, “संरा की कमेटी नंबर 1267 के सामने हमने इस आतंकी से जुड़े तमाम साक्ष्य रखे और दूसरे देशों से इन्हें साझा भी किया। इसमें पुलवामा हमला भी शामिल था।” 1267 कमेटी आतंकियों और उनके संगठनों पर प्रतिबंध से जुड़े वैश्विक मामलों को देखती है।

मसूद पर 2009 में पहली बार, 2016 में दूसरी बार पेश किया गया प्रस्ताव
पहली बार मनमोहन सरकार ने मुंबई हमले के बाद 2009 में अजहर मसूद के खिलाफ यूएन में प्रस्ताव पेश किया। दूसरी बार 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के बाद मोदी सरकार ने इस प्रस्ताव को यूएन में पेश किया। तीसरी बार 2017 में उड़ी में सेना के कैंप में हमले के बाद ये प्रस्ताव पेश किया गया। चौथी बार पुलवामा हमले के बाद पेश किया गया। मसूद ने 25 साल में भारत में 20 से ज्यादा बड़े आतंकी हमले किए।

भारत में कई हमलों का जिम्मेदार है मसूद
मसूद अजहर भारत में कई आतंकी हमलों को साजिश रचने के साथ उन्हें अंजाम दे चुका है। इसी साल 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमला हुआ था। इसकी जिम्मेदारी भी मसूद के संगठन जैश ने ली थी। मसूद 2001 में संसद पर हुए हमले का भी दोषी है। इस दौरान नौ सुरक्षाकर्मियों की जान गई थी। इसके अलावा जनवरी 2016 में जैश के आतंकियों ने पंजाब के पठानकोट एयरबेस और इसी साल सितंबर में उरी में सेना के हेडक्वॉर्टर पर हमला किया था।

(Adapted from Bhaskar.com)