स्टार्ट-अप कंपनियों को एंजल टैक्स के बोझ से मुक्ति देने के लिए सरकार ने नया रास्ता निकाला है। एक अधिकारी ने कहा कि सरकार मान्यताप्राप्त निवेशकों को एंजल टैक्स से छूट देने पर विचार कर रही है। हालांकि उन्होंने कहा कि यह छूट हासिल करने के लिए निवेशकों को एक निश्चित नेटवर्थ के मानक का पालन करना पड़ सकता है। ‘मान्यताप्राप्त निवेशकों’ को परिभाषित करने का एक मकसद यह भी है कि स्टार्ट-अप कंपनियों में निवेश को बढ़ावा दिया जा सके।

अधिकारी के मुताबिक उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआइआइटी) मान्यताप्राप्त निवेशकों की परिभाषा तय करने पर काम कर रहा है। यह परिभाषा तय हो जाने के बाद उसे अनुमोदन के लिए वित्त मंत्रालय को भेज दिया जाएगा। अधिकारी ने कहा, ‘मान्यताप्राप्त या अच्छे निवेशक कितनी भी रकम का निवेश कर सकते हैं। लेकिन हमें एक मानदंड बनाना ही होगा। नियमों को इतना खुला होना ही चाहिए कि वह ज्यादा से ज्यादा निवेशकों को आकर्षित कर सके। लेकिन उसे बहुत ज्यादा खुला या बहुत ज्यादा सख्त नहीं होना चाहिए।’

विभाग के मुताबिक मान्यताप्राप्त या सही निवेशकों को एक वर्ष में कितनी रकम के निवेश की इजाजत दी जानी चाहिए, यह इस पर निर्भर करेगा कि उनकी कुल संपत्ति कितनी है। उदाहरण के लिए, अगर आप वर्ष में दो करोड़ रुपये का निवेश करते हैं, तो आपकी कुल संपत्ति उससे कम से कम 10 गुना ज्यादा होनी चाहिए। निवेशकों की कुल संपत्ति और निवेश की राशि में तारतम्यता होनी चाहिए। ऐसे निवेशकों में ट्रस्ट, व्यक्ति या पारिवारिक सदस्य शामिल हो सकते हैं। शर्ते पूरी करने वाले ऐसे निवेशकों को 25 करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश पर भी एंजल टैक्स से छूट दी जाएगी। वर्तमान में स्टार्ट-अप कंपनियों को सालाना 25 करोड़ रुपये तक के निवेश पर एंजल टैक्स से छूट मिली हुई है।

वर्तमान में हर साल 300-400 स्टार्ट-अप कंपनियों में एंजल निवेश हो रहा है। एंजल निवेशकों द्वारा लगाई निवेश की रकम 15 लाख रुपये से चार करोड़ रुपये तक होती है। विभाग स्टार्ट-अप कंपनियों में कैटेगरी-1 और कैटेगरी-2 के ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (एआइएफ) को भी टैक्स बोझ से मुक्त रखने पर विचार कर रहा है। 

(Adapted from Jagran.com)